भारत में जब भी कोई शुभ कार्य होता है — पूजा, व्रत, या मनोकामना — तो प्रसाद का चढ़ावा उसका सबसे पवित्र हिस्सा होता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मंदिर में प्रसाद चढ़ाना इतना शुभ क्यों माना जाता है?
प्रसाद का आध्यात्मिक महत्व
‘प्रसाद’ शब्द का अर्थ है कृपा, आशीर्वाद और शांति।
जब हम भगवान को प्रसाद अर्पित करते हैं, तो यह हमारा अहंकार छोड़कर समर्पण करने का प्रतीक होता है। भगवान को कुछ अर्पित करके, हम यह जताते हैं कि सब कुछ उन्हीं की देन है।
इसके बाद जब वही प्रसाद हमें वापस मिलता है, तो वह ईश्वर की कृपा का प्रसाद बन जाता है — जिसे ग्रहण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
मंदिर में प्रसाद चढ़ाने से मिलने वाले पुण्य
• यह मनोकामनाओं की पूर्ति का माध्यम है।
• नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य को दूर करता है।
• व्यक्ति में श्रद्धा और भक्ति की भावना बढ़ाता है।
• यह सकारात्मक ऊर्जा और संतोष प्रदान करता है।
अब घर बैठे करें यह शुभ कार्य — यजमान ऐप के साथ!
आज की व्यस्त जिंदगी में हर कोई मंदिर नहीं जा पाता।
लेकिन यजमान ऐप के माध्यम से अब आप देश के प्रसिद्ध मंदिरों में घर बैठे ही प्रसाद चढ़ा सकते हैं!
• भगवान के चरणों में प्रसाद अर्पित किया जाएगा
• पूजा विधि से सम्पन्न होगी
• और वही प्रसाद आपके घर तक पहुंचाया जाएगा
इस तरह आप भक्ति और तकनीक का सुंदर संगम करते हुए, हर दिन ईश्वर से जुड़े रह सकते हैं।
मंदिर में प्रसाद चढ़ाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और ईश्वरीय कृपा का प्रतीक है।
अब इस पुण्य कार्य को मोबाइल से करना भी संभव है — बस यजमान ऐप डाउनलोड करें और अपने ईष्ट देव को सच्ची भावना से प्रसाद अर्पित करें।