शास्त्रों में हर दिन का एक विशेष देवता और उपयुक्त पूजा-व्रत बताया गया है। अगर हम सप्ताह के दिनों के अनुसार पूजा करें तो हमें विशेष कृपा और शुभ फल प्राप्त होते|
रविवार – सूर्य देव की उपासना
· देवता: भगवान सूर्य नारायण
· पूजा-विधि: तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें लाल फूल, अक्षत, लाल चंदन डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
· उपवास/व्रत: सूर्य व्रत, सात रविवार का व्रत शुभ होता है।
· मंत्र:
ॐ घृणि सूर्याय नमः
· फल: आरोग्य, तेज, आत्मविश्वास, सरकारी कार्यों में सफलता।
सोमवार – भगवान शिव की उपासना
· देवता: भगवान भोलेनाथ
· पूजा-विधि: शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करें।
· उपवास/व्रत: सोमवारी व्रत, विशेष रूप से सावन महीने में शुभ।
· मंत्र:
ॐ नमः शिवाय
· फल: मनोकामना पूर्ति, मानसिक शांति, विवाह में बाधा दूर।
मंगलवार – भगवान हनुमान एवं मंगल देव की पूजा
· देवता: बजरंगबली, कुजे (मंगल ग्रह)
· पूजा-विधि: हनुमान मंदिर में जाकर सिंदूर, तेल और प्रसाद चढ़ाएं।
· उपवास/व्रत: मंगलवार व्रत या हनुमान चालीसा पाठ।
· मंत्र:
ॐ हं हनुमते नमः
· फल: भय, रोग और शत्रु से रक्षा, साहस में वृद्धि।
बुधवार – भगवान गणेश की उपासना
· देवता: श्री गणेश, विष्णु के रूपों की भी पूजा शुभ है।
· पूजा-विधि: दूर्वा, मोदक, हरिद्रा (हल्दी) से गणेश पूजन करें।
· उपवास/व्रत: बुधवार व्रत में हरी वस्त्र धारण करना शुभ।
· मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः
· फल: बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता।
गुरुवार – बृहस्पति देव व भगवान विष्णु की उपासना
· देवता: श्री हरि विष्णु, बृहस्पति गुरु
· पूजा-विधि: पीले वस्त्र, चने की दाल, पीला पुष्प और तुलसी अर्पित करें।
· उपवास/व्रत: बृहस्पतिवार व्रत, पीला भोजन ग्रहण करें।
· मंत्र:
ॐ बृं बृहस्पतये नमः
· फल: धन, ज्ञान, वैवाहिक सुख, गुरु कृपा।
शुक्रवार – माँ लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा
· देवता: देवी लक्ष्मी, संतोषी माता
· पूजा-विधि: सफेद या लाल वस्त्र पहनकर दीपक जलाएं, खीर, बताशे, गुड़ का भोग लगाएं।
· उपवास/व्रत: शुक्रवारी या संतोषी माता व्रत।
· मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः
· फल: धन, सौभाग्य, वैभव, घर में सुख-शांति।
शनिवार – भगवान शनिदेव और हनुमान जी की पूजा
· देवता: शनिदेव, हनुमान जी, भैरव जी
· पूजा-विधि: पीपल वृक्ष की पूजा करें, तिल का तेल का दीपक जलाएं।
· उपवास/व्रत: शनि व्रत, शनि चालीसा पाठ।
· मंत्र:
ॐ शं शनैश्चराय नमः
· फल: शनि दोष शांति, कर्म सुधार, नकारात्मकता से मुक्ति।