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हरतालिका तीज image
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हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार है, जो विशेष रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है| यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की स्मृति में मनाया जाता है| इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है|
हरतालिका तीज क्या है?
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है| यह मुख्य रूप से उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मनाई जाती है| यह त्योहार सुहागन स्त्रियाँ और कुंवारी कन्याएँ भगवान शिव और माता पार्वती के आशीर्वाद के लिए करती हैं|
हरतालिका तीज का अर्थ और नाम की उत्पत्ति
“हरतालिका” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है:
• हर = हरण करना (चुरा लेना)
• तालिका = सखी या सहेली
मान्यता के अनुसार, माता पार्वती की सहेलियाँ उन्हें उनके पिता के घर से हर (चुरा) ले गई थीं, ताकि उनका विवाह जबरदस्ती भगवान विष्णु से न हो जाए| यही कारण है कि इसे हर-तालिका कहा जाता है|
पौराणिक कथा / मान्यता
पार्वती और शिव का मिलन:
• माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया|
• कई वर्षों तक उन्होंने कठिन व्रत और तपस्या की|
• उनके इस समर्पण और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया|
• यह दिन वही दिन माना जाता है जब शिव ने पार्वती को स्वीकार किया था|
इसलिए, हरतालिका तीज का व्रत स्त्रियाँ सौभाग्य की प्राप्ति, सुखी वैवाहिक जीवन और अच्छे वर की प्राप्ति के लिए करती हैं|
हरतालिका तीज व्रत की विशेषताएँ
1. निर्जला व्रत: इस दिन स्त्रियाँ बिना जल के व्रत करती हैं — न अन्न, न जल| यह व्रत बहुत कठिन माना जाता है|
2. पूजन: भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति बनाकर विधिपूर्वक पूजन किया जाता है|
3. कथावाचन: हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनी और सुनाई जाती है|
4. सुहाग सामग्री: सुहागिन स्त्रियाँ 16 श्रृंगार करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं|
5. रात्रि जागरण: महिलाएँ रात्रि में जागरण करती हैं और भजन-कीर्तन करती हैं|
हरतालिका तीज के धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ
• वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है|
• कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है|
• यह व्रत आत्मसंयम, श्रद्धा और तपस्या का प्रतीक है|
• शिव-पार्वती जैसे आदर्श दांपत्य जीवन की कामना की जाती है|
हरतालिका तीज का सांस्कृतिक पक्ष
• इस दिन महिलाएँ पारंपरिक वस्त्र, साड़ी, गहने पहनती हैं|
• लोकगीत, नृत्य और हँसी-मजाक के साथ त्योहार को हर्षोल्लास से मनाया जाता है|
• यह पर्व महिलाओं के सामाजिक मेल-जोल का अवसर भी प्रदान करता है|
हरतालिका तीज 2025 में कब है?
हरतालिका तीज 2025 में – 27 अगस्त (बुधवार) को मनाई जाएगी|
निष्कर्ष
हरतालिका तीज एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टि से समृद्ध पर्व है। यह न केवल वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए उपासना का माध्यम है, बल्कि यह नारी शक्ति, आस्था और संयम का भी प्रतीक है।
लड़के या पुरुष भी हरतालिका तीज का व्रत कर सकते हैं, लेकिन यह परंपरागत रूप से महिलाओं का व्रत माना गया है|
इसका कारण क्या है? और पुरुषों के लिए यह व्रत क्यों उपयोगी हो सकता है?
हरतालिका तीज की पौराणिक कथा में माता पार्वती का तप और भगवान शिव को पाने की इच्छा मुख्य है|
इसलिए यह व्रत पारंपरिक रूप से:
• सुहागन स्त्रियाँ (पति की लंबी उम्र के लिए)
• कुंवारी कन्याएँ (मनचाहा वर पाने के लिए) करती हैं|
परंतु…
आधुनिक दृष्टिकोण से:
धार्मिक रूप से कोई ऐसा निषेध नहीं है कि पुरुष यह व्रत नहीं रख सकते|
यदि कोई पुरुष:
• अपने जीवन में सच्चा प्रेम, आध्यात्मिक साधना, या
• आदर्श पत्नी की प्राप्ति के लिए
• या भक्ति भाव से शिव-पार्वती की आराधना करना चाहता है,
तो वह भी यह व्रत कर सकता है|
कुछ लोग (विशेष रूप से आध्यात्मिक या ब्रह्मचारी जीवन जीने वाले) हरतालिका तीज को तप और भक्ति का माध्यम मानकर रखते हैं|
पुरुषों के लिए यह व्रत क्यों उपयोगी हो सकता है?
• शिव और पार्वती का व्रत करने से शिवतत्व की प्राप्ति होती है|
• आत्म-संयम, मानसिक दृढ़ता, और ध्यान की शक्ति बढ़ती है|
• अच्छे जीवन साथी की प्राप्ति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं (यदि अविवाहित हैं)
• वैवाहिक जीवन में शांति और संतुलन के लिए भी यह व्रत लाभकारी हो सकता है|
ध्यान देने योग्य बातें:
• यदि पुरुष यह व्रत करना चाहें तो पूजन विधि और कथा का पालन महिलाओं की तरह ही कर सकते हैं|
• लेकिन यह व्रत निर्जला (बिना जल) होता है, इसलिए स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर संकल्प लें|
• स्थानीय परंपराओं और परिवार की सहमति भी देखें, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में यह पुरुषों द्वारा नहीं किया जाता|
निष्कर्ष:
हाँ, लड़के या पुरुष यदि भक्ति भाव से करें तो हरतालिका तीज का व्रत कर सकते हैं|
यह उनके लिए भी पुण्यदायक और शिव-पार्वती कृपा का माध्यम बन सकता है|
यदि कोई पुरुष भक्ति भाव से हरतालिका तीज व्रत करना चाहता है, तो उसके लिए भी यह एक आध्यात्मिक साधना का अवसर बन सकता है|
यहाँ पर पुरुषों के लिए हरतालिका तीज व्रत की सरल विधि दी जा रही है, जिसे आसानी से घर पर किया जा सकता है|
पुरुषों के लिए हरतालिका तीज व्रत विधि (सरल रूप में)
व्रत की तिथि:
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (हरतालिका तीज)
व्रत का संकल्प (सुबह सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय)
• स्नान आदि के बाद साफ वस्त्र धारण करें|
ईश्वर के सामने बैठकर यह संकल्प लें:
“मैं (अपना नाम), शिव-पार्वती जी की कृपा प्राप्ति हेतु, आज हरतालिका तीज व्रत का पालन करूँगा/करूँगी। कृपया मेरे व्रत को सफल बनाएं।”
पूजन सामग्री:
• मिट्टी या धातु की शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियाँ या चित्र
• अक्षत (चावल), पुष्प, बेल पत्र, दूध, दही, शहद, घी, जल (पंचामृत)
• धूप, दीप, रुई, कपूर
• फल, मिठाई, सूखे मेवे
• पीला/साफ वस्त्र (आसन के लिए)
• कलश, रोली, मौली
पूजन विधि (सुबह या शाम को):
1. स्थापन:
• पूजा स्थल पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएँ।
• शिव-पार्वती और गणेश जी की मूर्तियों की स्थापना करें।
2. कलश स्थापना:
• जल से भरा हुआ कलश रखें, उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें।
3. पूजा करें:
• गणेश जी की पूजा पहले करें।
• फिर भगवान शिव और माता पार्वती का आवाहन करें।
• बेल पत्र, फूल, चंदन, अक्षत, और पंचामृत अर्पित करें।
• शिव-पार्वती मंत्र बोल सकते हैं:
🕉 “ॐ नमः शिवाय”
🕉 “ॐ गौरीशंकराय नमः”
• शिव-पार्वती विवाह की कथा (व्रत कथा) अवश्य सुनें या पढ़ें।
4. आरती करें:
• शिव जी और पार्वती जी की आरती करें —
“ॐ जय शिव ओंकारा”
“जय अम्बे गौरी”
व्रत का नियम:
• यह व्रत पारंपरिक रूप से निर्जला (बिना जल) किया जाता है।
पुरुष चाहें तो स्वास्थ्य के अनुसार:
o पूर्ण उपवास (फलाहार भी नहीं)
o या सिर्फ फलाहार रख सकते हैं।
• दिन भर भक्ति, ध्यान, और भजन करें।
व्रत का पारण (अगले दिन प्रातः):
• अगले दिन सुबह स्नान कर पूजा करें।
• शिव-पार्वती को पुनः नमस्कार करें।
• व्रत का पारण जल/फल/सादा भोजन से करें।
विशेष ध्यान दें:
1. मानसिक शुद्धता और संयम रखें।
2. मोबाइल/टीवी आदि से दूरी बनाएँ — दिन को पूरी तरह आध्यात्मिक रखें।
3. निःस्वार्थ भावना से शिव-पार्वती की आराधना करें।
नोट:
यह व्रत कठिन जरूर है, लेकिन भक्ति और सच्चे मन से किया गया व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को अत्यंत प्रिय होता है — चाहे वह स्त्री करे या पुरुष।

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