1. प्रतिमा स्थापना:
• घर, पंडाल या मंदिर में श्री गणेश की मूर्ति की स्थापना होती है (मिट्टी/धातु/शुद्ध रूप से बनी प्रतिमा)
2. पूजन विधि:
• मोदक, दूर्वा (घास), लाल फूल, चंदन, अक्षत, रोली, धूप, दीप आदि से पूजा की जाती है।
• व्रत रखे जाते हैं, और गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, गणपति आरती का पाठ होता है।
3. भक्तों का आयोजन:
• विशेषकर महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना आदि में बड़े-बड़े पंडाल सजते हैं।
• सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन, नृत्य आदि होते हैं।
4. विसर्जन (गणपति बप्पा मोरया):
• 1 दिन से लेकर 10 दिन तक गणपति को विराजित करने के बाद, विसर्जन किया जाता है (विशेषकर अनंत चतुर्दशी को)
• विसर्जन के समय नारे लगाए जाते हैं:
“गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!”