यह त्योहार गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह अक्सर अगस्त या सितंबर महीने में पड़ता है।
1. भगवान विष्णु की उपासना:
o इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है।
o उनका यह स्वरूप संपूर्ण ब्रह्मांड के संरक्षणकर्ता के रूप में जाना जाता है।
2. अनंत सूत्र बांधने की परंपरा:
o एक 14 गांठों वाला केसरिया धागा (अनंत सूत्र) तैयार किया जाता है।
o पुरुष इसे दाहिने हाथ में और महिलाएं इसे बाएं हाथ में बांधती हैं।
o माना जाता है कि यह धागा सौभाग्य, समृद्धि और कष्टों से रक्षा करता है।
3. धार्मिक कथा (अनंत व्रत कथा):
o एक बार कुशावती नगरी के सुमंत ऋषि की पुत्री शुषीला ने यह व्रत किया था।
o उसने अनंत सूत्र बांध कर जीवन की कठिनाइयों से छुटकारा पाया।
o यह व्रत करने से धन, सुख, वैभव और शांति मिलती है।
4. गणेश विसर्जन:
o यह दिन गणेशोत्सव के समापन का दिन भी होता है।
o भक्त 10 दिन पूजित गणपति बाप्पा की मूर्ति को जल में विसर्जित करते हैं और बोलते हैं:
“गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!”
1. स्नान और संकल्प:
सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
2. पूजन सामग्री:
o अनंत सूत्र (14 गांठ वाला धागा)
o कलश, फूल, फल, दीपक, रोली, अक्षत
o भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की मूर्ति या चित्र
3. पूजन विधि:
o भगवान विष्णु की पूजा करें।
o अनंत सूत्र की पूजा कर उसे हाथ में बांधें।
o फिर अनंत व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
4. भोजन और व्रत नियम:
o व्रती दिन भर व्रत रखते हैं।
o शाम को फलाहार या साधारण सात्विक भोजन करते हैं।
• जीवन के संकटों से मुक्ति
• धन-धान्य में वृद्धि
• पारिवारिक कलह का अंत
• मानसिक और आध्यात्मिक शांति
• विष्णुजी की कृपा प्राप्त होती है